गर्मी के द्वारा धान की फसल अधिक फ़ैल रहा ये रोग तो क्या करे ? एवं रोकथाम-

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धान के प्रमुख रोग जीवाणु पर्ण, अंगमारी रोग, पर्ण झुलसा, पत्ती का झुलसा रोग, ब्लास्ट या झोंका रोग, एवं 

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खैरा रोग, बकानी रोग, स्टेम बोरर कीट, लीफ फोल्ड कीट, हॉपर, ग्रॉस हॉपर, सैनिक कीट आदि शामिल हैं।

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 रोग के लक्षणों में पत्तियों के किनारे से शुरू होकर बीच तक सूखने लगना, 

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सूखे पीले पत्ते के साथ-साथ राख के रंक के चकत्ते दिखना शामिल होता है। बालियां दानारहित रह जाती हैं।

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रोग की रोकथाम के लिए 74 ग्राम एग्रीमाइसीन-100 और 500 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (फाइटोलान)/ ब्लाइटॉक्स-50/क्यूप्राविट को

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 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से 3-4 बार 10 दिनों के अंतराल से छिड़काव करें।

इस रोग के लगने पर नाइट्रोजन की मात्रा कम कर रखनी चाहिए।

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पौधों की स्वस्थता के लिए नियमित जलावृद्धि और पोषण की आवश्यक है।

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रोगों की पहचान एवं उपायों की कार्रवाई समय पर करें, ताकि रोग न फैले।

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